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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
विदेह नूतन अंक
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डा. किशन कारीगर

अहाँ अपना टा बाजब लिखब के मैथिली कहलियै

आ अनकर बजबाक लिखबाक टोन शैली के
कोन हिसाबे राड़/कोसिकन्हा कहबा देलियै?
मानकी दललपनी/ व्याकरणक भवडाह बंद करै जाउ
ई पुरूस्कारी खेल त आब पब्लिको नीक स बूझैइए.

अहाँ सब निर्लज्ज भेल मानकी पाखंड मे
मैथिली साहित्य समाज के वर्गभेद मे बंटैत एलहुं
की बारहो बरण के लोक शैली के कहियो?
अहाँ सब मैथिली कहबाक बेगरता नै बुझलहुँ?

अहिं के कहनाम जे सबटा ज मैथिलीए छियै
त फेर शुद्ध अशुद्ध मैथिली के भेद कथि के?
लोक समाज स मैथिली कटैत गेल
अहाँ सबके अकादमी पुरस्कार स संतोख नै भेल?

की दिक्कत यै समावेशी मैथिली स?
अहाँ अपना शैली के मानै छी नीक बात
ओकरा संगे अनकर लोक बाजब शैली सेहो जोड़ू
आ जल्दी मानकी दललपनी सब छोड़ू

मैथिली भाषा साहित्य मे बारहो बरण रहतै त
लोक समाज जुड़त बुझत मैथिली साहित्य के
सबके बोली के एकदम बराबर सम्मान हेतै
ई नीक काज किए ने करै जाई छी?

बंद करै जाउ भाषा साहित्य नामे एकाधिकार
मैथिली अहिं टा के बपौती नै ने छी.
कतबो समावेशी मैथिली के हो हल्ला होउ
अहाँ तइयो संपादित क मानकी मैथिली किए करै छी?
- डा. किशन कारीगर, मूल नाम- डा. कृष्ण कुमार राय)

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